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सीएम आवास के बाहर जदयू कार्यकर्ताओं का उबाल, अमित शाह के खिलाफ लगे तीखे नारे; नीतीश के फैसले से बढ़ी सियासी गर्मी

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पटना: बिहार की राजनीति में चल रहे तेज घटनाक्रम के बीच गुरुवार को उस समय माहौल और गर्म हो गया, जब मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़ी संख्या में जुटे जदयू कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। “अमित शाह मुर्दाबाद” और “नीतीश कुमार होश में आओ” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। यह विरोध उस समय देखने को मिला जब गृह मंत्री अमित शाह दिल्ली से पटना पहुंचे और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद बाहर निकले।
दरअसल, नीतीश कुमार द्वारा राज्यसभा जाने और मुख्यमंत्री पद छोड़ने के फैसले के बाद जदयू के अंदर ही नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं। पार्टी के कई कार्यकर्ता और समर्थक इस फैसले से असहज बताए जा रहे हैं और इसे बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव की शुरुआत मान रहे हैं। इसी नाराजगी का असर सड़कों पर भी देखने को मिला, जब कुछ कार्यकर्ताओं ने भाजपा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि जदयू को कमजोर करने के लिए राजनीतिक साजिश रची जा रही है।
मुख्यमंत्री आवास के बाहर जुटे समर्थकों का आरोप था कि बिहार की जनता ने विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए को जनादेश दिया था, लेकिन अब उन्हें अचानक मुख्यमंत्री पद से हटाकर दिल्ली भेजने की कोशिश की जा रही है। कार्यकर्ताओं का कहना था कि यह कदम जदयू को कमजोर करने और बिहार की सत्ता पर भाजपा का पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
प्रदर्शन के दौरान कई कार्यकर्ताओं ने भाजपा के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए आरोप लगाया कि “ऑपरेशन लोटस” जैसी राजनीतिक रणनीति के तहत जदयू को धीरे-धीरे खत्म करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना था कि कुछ नेताओं की मदद से पार्टी के भीतर ही ऐसी स्थिति पैदा की गई, जिससे नीतीश कुमार को राज्यसभा की ओर भेजने का रास्ता तैयार किया गया।
इससे पहले भी भाजपा कोटे से राज्य सरकार में शामिल एक मंत्री को विरोध कर रही भीड़ के गुस्से का सामना करना पड़ा था। बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों ने उन्हें घेरने की कोशिश की, जिसके बाद सुरक्षा बलों को स्थिति संभालनी पड़ी।
वहीं, विपक्ष ने भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार की जनता सत्ता परिवर्तन के पक्ष में नहीं है, लेकिन राजनीतिक साजिश के तहत मुख्यमंत्री पद से हटाने की पूरी पटकथा पहले से तैयार की गई थी। उन्होंने याद दिलाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान “2025 से 2030 फिर से नीतीश” का नारा दिया गया था और जनता ने उसी भरोसे पर वोट दिया था।
तेजस्वी यादव का कहना था कि उनकी पार्टी पहले से यह कहती रही है कि चुनाव के समय नीतीश कुमार को आगे कर भाजपा अपना राजनीतिक लक्ष्य साध रही है। उनके अनुसार, चुनाव के बाद परिस्थितियां बदलते ही सत्ता समीकरण भी बदलने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र की तरह बिहार में भी सहयोगी दल को कमजोर कर अंततः भाजपा अपनी सरकार बनाने की दिशा में बढ़ सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की घोषणा के बाद बिहार की राजनीति में नया अध्याय शुरू हो सकता है। करीब दो दशकों तक राज्य की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार के इस फैसले ने सत्ता समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि एनडीए गठबंधन बिहार में नए मुख्यमंत्री के रूप में किस चेहरे को सामने लाता है और आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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